Global Fintech Fest में गडकरी ने कहा कि पहले टोल प्लाजा पर औसत इंतजार का समय करीब 12 मिनट हुआ करता था। FASTag आने के बाद इसमें 80-90% तक सुधार हुआ है। अब सरकार इसे और बेहतर बनाकर इंतजार को लगभग खत्म करना चाहती है।
बिना बैरियर कैसे कटेगा टोल?
सरकार Multi Lane Free Flow (MLFF) सिस्टम की ओर बढ़ रही है। इसमें टोल प्लाजा पर फिजिकल बैरियर की जरूरत नहीं होगी। वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे और टेक्नोलॉजी के जरिए टोल की पहचान और भुगतान किया जाएगा।
गडकरी के मुताबिक, FASTag के साथ Automatic Number Recognition जैसी तकनीक का इस्तेमाल इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बना सकता है।
13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी
FASTag को 2021 में अनिवार्य किया गया था। गडकरी के मुताबिक, नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर FASTag की पहुंच अब 98% से ज्यादा हो चुकी है और देश में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी किए जा चुके हैं।
सरकार का मानना है कि तेज टोलिंग से न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। गडकरी के अनुसार, समय की बचत का आर्थिक मूल्य सालाना करीब 68,500 करोड़ रुपये हो सकता है, जबकि करीब 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होने का अनुमान है।
Toll Revenue भी बढ़ने की उम्मीद
गडकरी ने कहा कि FASTag और Automatic Number Recognition के संयुक्त इस्तेमाल से टोल कलेक्शन भी बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इस सिस्टम से सालाना टोल रेवेन्यू में करीब 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने Fintech कंपनियों से दुनिया में इस्तेमाल हो रही बेहतर डिजिटल टोलिंग तकनीकों का अध्ययन करने और सरकार को सुझाव देने की भी अपील की।
FASTag Portability की सुविधा लॉन्च
गडकरी ने शुक्रवार को FASTag Portability की नई सुविधा भी लॉन्च की। इसके तहत वाहन मालिक अपने मौजूदा FASTag को नए बैंक अकाउंट से लिंक कर सकेंगे। यानी बैंक बदलने की स्थिति में उन्हें नया FASTag लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार अब UPI, Aadhaar, Vahan और FASTag जैसे डिजिटल सिस्टम को जोड़कर एक अधिक स्मार्ट और कनेक्टेड मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है। Barrier-Free Tolling इसी दिशा में अगला बड़ा कदम होगा।